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आहिस्ता आहिस्ता एक दौर गुज़र गया

सुनो न!
मैं पूरा सा नही हो पा रहा हूँ
कुछ समेटने की कोशिश कर रहा हूँ
पर खुद को बिखरा सा महसूस कर रहा हूँ
मुझमें जिद्द न थी तुझे पाने की
पर कुछ तो छूट सा गया है
न जाने किस अन्जाने तलाश में आगे निकल चला हूँ
दरसअल, याद आ रहा है
वो सब कुछ जो बदल सा गया है
तुम, तुम्हारा साथ और एहसास
सब याद आ रहा है
एक साया सा है मेरे साथ
जिससे मैं ख़ुद को जुदा कर रहा हूँ
भूल जाऊ, ऐसी कोशिश है मेरी
पर भूलकर जैसे खुद अधूरा सा लग रहा हूँ।।

#ख़्वाब #मेरे_सपने

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मैं पूरा सा नही हो पा रहा हूँ

सुनो न! मैं पूरा सा नही हो पा रहा हूँ कुछ समेटने की कोशिश कर रहा हूँ पर खुद को बिखरा सा महसूस कर रहा हूँ मुझमें जिद्द न थी तुझे पाने की पर कुछ तो छूट सा गया है न जाने किस अन्जाने तलाश में आगे निकल चला हूँ दरसअल, याद आ रहा है वो सब कुछ जो बदल सा गया है तुम, तुम्हारा साथ और एहसास सब याद आ रहा है एक साया सा है मेरे साथ जिससे मैं ख़ुद को जुदा कर रहा हूँ भूल जाऊ, ऐसी कोशिश है मेरी पर भूलकर जैसे खुद अधूरा सा लग रहा हूँ।। #ख़्वाब #मेरे_सपने

इश्क़-ए-लफ्फाज़ी (भाग-1)

अनेक कविताओं और कहानियों का संस्मरण करते हुए, आज यह धडकता दिल बहुत परेशान था | शायद कुछ कहना चाहता था, या खुद को समझाना चाहता था | दरअसल यह बेचैनी किसी चीज की नही थी बल्कि उसे, उसमें समाहित प्रेम ने विचलित कर रखा था | प्रेम कभी भी किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या खुद से हो सकता है | प्रेम हमारे जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है | जब आप किसी के साथ प्रेम में होते हैं तो यह आपके जीवन के सबसे ख़ूबसूरत लम्हों और एहसासों में से एक होता या यूं कह लें कि इसका स्थान सर्वोच्च होता है | यदि प्रेम का ताल्लुक किसी व्यक्ति विशेष से हो तो इसका तात्पर्य यह बिलकुल नही कि उसे हासिल किया जाय | उस व्यक्ति से आपके दिल से लगाव और उसके प्रति अटूट विश्वास व गहनता ही प्रेम का प्रतीक है | जब आप उसके छोटे-छोटे लम्हों में खुश होना सीख जाते है, उसके साथ कुछ पल बिताने व अपने नज़रों के सामने देखने भर से अन्दर ही अन्दर प्रफुल्लित होते है, सुकून महसूस करते हैं | यही प्रेम को जीने और महसूस करने का दौर होता है | जब आपको उस व्यक्ति से लगाव हो जाता है तो आप उसकी देखभाल व उसके प्रति अपने एहसासों व भावनाओं...

थोड़े दूर बेहद करीब से ...

आज गुजरे हो तुम बेहद करीब से  शांत क़दमों के कुछ फासलों पर,बेचैन दिल के करीब से  आज गुजरे हो तुम | तुझे आना ही न था आज इस बेचैन दिल के गलियों में  किसी और के जश्ने शरीक में, मेरे नज़रों के करीब से  आज गुजरे हो तुम || तुम कुछ यूं मुस्कुराते निकले मिलने किसी दिल-ए-अजीज से इस खिलती मुस्कान में उलझे बगैर, मन रोकना चाहता खुद को अपने धड़कन को सम्भाले बगैर तेरे दिल के करीब से क्युकी आज गुजरे हो तुम कुछ दूर बेहद करीब से ||